बंगाल की जेलों में 'हाउसफुल': क्षमता से ज़्यादा कैदियों के बोझ तले दबा सिस्टम, कलकत्ता हाई कोर्ट पहुँचा मामला
Bengal's prisons 'housefull'
कोलकाता। Bengal's prisons 'housefull':- बंगाल की जेलों में इन दिनों हालात बेहद चिंताजनक हो चुके हैं। राज्य की अधिकांश जेल अपनी तय क्षमता से कहीं अधिक कैदियों के बोझ तले दबे जा रही हैं, जिसके कारण बंदियों की बुनियादी मानवीय दशाएं बदतर हो गई हैं।
हाल ही में हुए सत्ता परिवर्तन और राजनीतिक उलटफेर के बाद विभिन्न मामलों में मुकदमों और गिरफ्तारियों का सिलसिला तेजी से बढ़ा है। पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद आरोपितों को लगातार जेल भेजा जा रहा है।
जेल में पहले से ही जगह नहीं थी और अब इस तेज गति से बढ़ती बंदियों की संख्या ने प्रशासन के सामने 'तिल धरने की जगह न होने' जैसी विकट स्थिति पैदा कर दी है। यदि कैदियों के आने की रफ्तार यही रही, तो आने वाले दिनों में यह संकट एक भयावह रूप अख्तियार कर सकता है।
वैसे भी पिछले रविवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि 'जहां हाथ रखता हूं, दुर्गंध आती है। स्थिति ऐसी है कि कोलकाता के ब्रिगेड परेड मैदान को ही जेल में बदलना पड़ेगा। हालांकि उनकी यह बातें कटाक्ष थी लेकिन जिस रफ्तार से गिरफ्तारियां हो रही है वह बहुत कुछ कह रहा है।
जेल विभाग है परेशान
इस विकट समस्या को पुलिस और जेल विभाग के आला अधिकारी भी दबी जुबान में स्वीकार कर रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि संख्या बल में इस अप्रत्याशित वृद्धि के कारण मजबूरीवश कैदियों को बेहद तंग जगहों पर एक साथ ठूंस-ठूंस कर रखना पड़ रहा है।
इस अव्यवस्था के बीच सबसे बड़ी चिंता सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर खड़ी हो गई है। जेल विभाग के सूत्रों के अनुसार, हालिया राजनीतिक बदलावों के बाद गिरफ्तार किए गए लोगों में से एक बड़ी संख्या निवर्तमान सत्तारूढ़ दल के प्रभावशाली नेताओं और कार्यकर्ताओं की है।
जेलों के भीतर इन रसूखदार बंदियों की आपसी प्रतिद्वंद्विता और सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखना जेल प्रशासन के लिए चौबीसों घंटे की एक बड़ी चुनौती बन गया है।
गंभीर स्थिति
इधर, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने जेलों की इस 'ओवरक्राउडिंग' यानी ठसाठस स्थिति पर गहरी आपत्ति जताते हुए इसे बेहद 'चिंताजनक' करार दिया है। विभिन्न मानवाधिकार संगठनों ने इस मुद्दे को लेकर अदालत का दरवाजा भी खटखटाया है, जिस पर कलकत्ता हाई कोर्ट में बाकायदा मामला चल रहा है।
पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान कोर्ट में पेश की गई एक आधिकारिक रिपोर्ट के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो राज्य के कुल 61 जलों, जिसमें उप-जेल, जिला, केंद्रीय, महिला और खुले सुधारगृह शामिल हैं, की कुल प्राधिकृत क्षमता 21,929 कैदियों की है।
इसके विपरीत, इस वर्ष मार्च तक प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इन जेलों में 23,886 कैदी बंद हैं। इनमें 17,642 विचाराधीन कैदी हैं, जिनकी कानूनी नियति का फैसला अभी अदालत में लंबित है।
कई जिलों में तो स्थिति यह है कि क्षमता से दोगुने या उससे भी ज्यादा कैदी रखे गए हैं। अदालतों और मानवाधिकार आयोगों की कड़ी चेतावनियों के बावजूद धरातल पर सुधार की गति बेहद धीमी है, जो किसी बड़े प्रशासनिक या मानवीय संकट को आमंत्रण दे रही है।
जेल में मौजूदा कैदियों की संख्या
- सिलिगुड़ी- 190- 634
- जलपाईगुड़ी-867-1,283
- मालदा- 353- 1,075
- दमदम-3,200-2,507
- बैरकपुर-172-378
- बसीरहाट-102-256
- हावड़ा- 319-541
- चंदननगर-98-186
- झाड़ग्राम- 100-209
- बर्द्धमान -801- 917
- अलीपुर (महिला)-314-410
(सोर्स: जेल विभाग एवं कलकत्ता हाई कोर्ट में जमा आधिकारिक सरकारी रिपोर्ट।)